श्रीमद्भागवत: भूमिका, इतिहास एवं महत्त्व

By Satprem Das

Certificate Course

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Course Duration

20 घंटे

Videos

2 घंटे/ सत्र

No. Of Sessions

10

Sessions per week

2

Language
Hindi

Eligibility

कोई भी

Schedule of Classes

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Starts on
-

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शाम 4 बजे से 6 बजे तक Regular classes on शनिवार और रविवार

About the Teacher

teacher

Satprem Das

श्रीमान सत्प्रेम प्रभु जी इस्कॉन भागवत महाविद्यालय, गोवेर्धन में आध्यत्मिक शिक्षक है।

आधात्मिक योग्यता- 1-भक्ति शास्त्री 2-भक्ति वैभव 3-भक्ति वेदांत (अध्यनरत) शैक्षणिक योगयता- 1-कला स्नातक (भोपाल, म.प.) 2-होटल मैनेजमेंट में स्नातक (दिल्ली) 3-अनुभव-अनेक वर्षों तक मुम्बई के 5 स्टार होटलों में अनेक वर्षों तक सेवाएं दी है । उनके निजी जीवन में आश्चर्यजनक घटनाओं की श्रृंखलाओ के बाद आध्यात्मिकता के प्रति उनका झुकाव हो गया था वे कृष्णभावना में आने का सारा श्रेय कृष्ण को तथाकथित नकारात्मक स्थितियों की श्रृंखला बनाने के लिए और जिन भक्तो ने उनका सहयोग किया उनको देते है, विशेष रूप से उनकी कृष्ण भक्त माता जी को। विशेष आकर्षण- कृष्णभावनामृत में आने के बाद उन्होंने दृढ़ संकल्प के साथ सफल योद्धा की तरह संघर्ष किया, क्योंकि उन्हें पार्किंसंस की लाइलाज बीमारी ने घेर लिया था। लेकिन जैसे ही उन्होंने श्रीमद्भागवत का अध्ययन करना शुरू किया उनका स्वास्थ्य ठीक हो गया और अब उनका जीवन श्रीमद्भागवत के अध्ययन की करुणा का जीता-जागता उदाहरण है।

Course Overview

कोर्स विवरण:

प्रतिभागी श्रील प्रभुपाद के भाव (मूड) और उनके मिशन का गहराई से अध्ययन करेंगे। वे उनके दिव्य संघर्षों को देखेंगे तथा उनके मार्ग में आने वाली हर बाधा के समाधान को समझेंगे।

कोर्स सामग्री:

श्रीमद भागवतम का आमुख, प्रस्तावना और भूमिका 

लक्षित दर्शक:

नये व दीक्षित  भक्त दोनों 

इस कोर्स से छात्र क्या हासिल करेंगे?

इस 8-सत्रीय पाठ्यक्रम के माध्यम से छात्रों को—

  • श्रीमद्भागवतम का मूल उद्देश्य स्पष्ट रूप से समझ में आएगा—कि यह ग्रंथ केवल कथा नहीं, अपितु जीवन का परम मार्गदर्शक है।
  • भगवत-तत्त्व, जीव-तत्त्व और भक्ति-तत्त्व का आधारभूत ज्ञान प्राप्त होगा।
  • श्रवण की शुद्ध विधि (How to hear Bhagavatam properly) समझ में आएगी, जैसा कि आचार्यों ने बताया है।
  • शास्त्रीय दृष्टिकोण (Scriptural Vision) विकसित होगा, जिससे वे भागवत को केवल पढ़ेंगे नहीं, बल्कि जीएंगे।
  • गुरु-परंपरा और BBT की प्रामाणिकता का बोध होगा, जिससे उनका श्रद्धा-आधार दृढ़ होगा।
  • जीवन की समस्याओं को आध्यात्मिक दृष्टि से देखने की क्षमता विकसित होगी।

कोर्स में क्यों शामिल होना चाहिए?

क्योंकि श्रीमद्भागवतम का सही प्रवेश-द्वार (आमुख, प्रस्तावना, भूमिका) जाने बिना अध्ययन अधूरा रह जाता है।

यह पाठ्यक्रम श्रद्धा को ज्ञान में और ज्ञान को अनुभूति में बदलने का माध्यम बनेगा।

आज के समय में जहाँ बहुत सारी अप्रामाणिक व्याख्याएँ हैं, यह कोर्स शुद्ध वैष्णव सिद्धांतों पर आधारित सही समझ देगा।

यह सुनने और समझने की योग्यता (Qualification of a listener) को विकसित करता है—जो भागवत अध्ययन का मूल है।

यह कोर्स केवल जानकारी नहीं देता, बल्कि जीवन को दिशा और उद्देश्य प्रदान करता है।

इस पाठ्यक्रम के माध्यम से हम विद्यार्थियों की किन समस्याओं का समाधान कर रहे हैं?:

सतही समझ 

समस्या: छात्र भागवत को केवल कथा या इतिहास मानते हैं।

समाधान: यह कोर्स उन्हें भागवत के गूढ़ तत्त्व और उद्देश्य से जोड़ता है।

श्रद्धा की कमजोरी 

समस्या: शास्त्र, गुरु और प्रक्रिया में पूर्ण विश्वास नहीं बन पाता।

समाधान: BBT की भूमिका और आचार्यों के दृष्टिकोण से दृढ़ श्रद्धा का निर्माण होता है।

 शास्त्र पढ़ने की विधि का अभाव 

समस्या: “कैसे पढ़ें, कैसे सुनें?” यह स्पष्ट नहीं होता।

समाधान: यह कोर्स सही श्रवण-पठन की विधि और मानसिकता सिखाता है।


Frequently Asked Questions