संपूर्ण श्रीमद्भागवतम् का संक्षिप्त अध्ययन (डिप्लोमा पाठ्यक्रम)
48 दिवसीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम
By ISKCON Bhagavata Mahavidyalaya
Certificate Course
Course Duration
96 घंटे
96 घंटे
Videos
2 घंटे/ सत्र
2 घंटे/ सत्र
No. Of Sessions
48
48
Sessions per week
5
5
Language
Hindi
Eligibility
कोई भी इच्छुक भक्त
कोई भी इच्छुक भक्त
Schedule of Classes
Starts on
-
सायं 4 से 6 बजे तक
Regular classes onसोमवार से शुक्रवार
About the Teacher
ISKCON Bhagavata Mahavidyalaya
About the Teacher
ISKCON Bhagavat Mahavidyalaya aims to provide a facility for its members to study, practice, and disseminate the teachings of Srimad Bhagavatam, along with the writings of the Gaudiya Vaisnava acaryas and the branches of Vedic philosophy, culture, music and science in the context of Srila Prabhupada’s teachings. ISKCON Bhagavata Mahavidyalaya is located in Sri Govardhan dhama to systematically propagate the teachings of Śrīmad-Bhāgavatam and Caitanya-caritāmṛta to the society at large.
To accomplish the above mission, ISKCON Bhagavata Mahavidyalaya will facilitate philosophical training for adult residential and non-residential students through the traditional Vedic educational methods. ISKCON Bhagavat Mahavidyalaya has been inspired by the service and efforts of His Grace Gopiparanadhana Prabhu and His Holiness Gaur Krishna Gosvami Maharaja. Their dedication toward the study and the dissemination of the teachings of Srimad Bhagavatam is the torchlight guiding us forward to serve this mission.
Course Overview
पाठ्यक्रम विवरण:
श्रीमद-भागवतम न केवल परम कारण को जानने का एक आध्यात्मिक विज्ञान है बल्कि इसके आधार पर उनके प्रति हमारे संबंध और इस संपूर्ण ज्ञान के आधार पर मानव समाज की पूर्णता के प्रति हमारे कर्तव्य को जानने के लिए भी परम पूर्ण विज्ञान है। यह संस्कृत भाषा में वैदिक साहित्य रूपी कल्पवृक्ष का परिपक्व फल कहा गया है, और अब इसका विस्तृत रूप से हिंदी में अनुवाद किया गया है ताकि केवल ध्यान से पढ़ने मात्र से ही पाठक न केवल भगवान को पूरी तरह से जान सके बल्कि नास्तिकों के हमले से खुद को बचाने के लिए पर्याप्त रूप से शिक्षित भी हो सके। . इसके अतिरिक्त, पाठक नास्तिकों को भी ईश्वर की सत्ता के प्रति विश्वस्त करने में सक्षम होगा। श्रीमद-भागवतम परम स्रोत की परिभाषा के साथ शुरू होता है। यह वेदांत-सूत्र के उसी लेखक, श्रील व्यासदेव द्वारा वेदांत-सूत्र पर एक प्रामाणिक भाष्य है, और धीरे-धीरे यह ईश्वर प्राप्ति की उच्चतम अवस्था तक नौ सर्गों में विकसित होता है। दिव्य ज्ञान की इस महान पुस्तक का अध्ययन करने के लिए केवल एक ही योग्यता की आवश्यकता है कि क्रमशः सावधानी से आगे बढ़ें और एक सामान्य पुस्तक की तरह मनमाने ढंग से आगे न बढ़ें। इसे एक के बाद एक अध्याय के क्रम से पढ़ना चाहिए। पढ़ने की सामग्री को मूल संस्कृत पाठ, उसके हिंदी लिप्यंतरण, समानार्थक शब्द, अनुवाद और तात्पर्य के साथ व्यवस्थित किया गया है ताकि पहले नौ सर्गों को समाप्त करने के अंत में एक ईश्वर-प्राप्त आत्मा बनना सुनिश्चित हो।
पाठ्यक्रम सामग्री:
संपूर्ण श्रीमद-भागवतम का विहंगावलोकन (ओवरव्यू)
लक्षित श्रोतागण:
श्रीमद्भागवत का अध्ययन करने के इच्छुक वैष्णव |
छात्रों के लिए महत्वपूर्ण दिशानिर्देश:
समय पर सत्र में शामिल हों. प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए कम से कम 75% उपस्थिति बनाए रखें।
इस पाठ्यक्रम से छात्रों को क्या लाभ होगा?
1. विद्यार्थी प्रत्येक प्रसंग का सार समझ सकेंगे।
2. छात्रों को श्रीमद्भागवतम के गहरे अर्थ समझ में आएंगे
इस पाठ्यक्रम में क्यों भाग लेना चाहिए?
1.भक्तिवेदांत के तात्पर्य को गहराई से समझना।
2. हमारे आचार्यों द्वारा बताए गए भक्ति तत्व को गहराई से समझना।
हम पाठ्यक्रम के माध्यम से छात्रों की किन समस्याओं का समाधान कर रहे हैं?
1. श्रीमद्भागवत की प्रामाणिकता के बारे में संदेह का उत्तर मिलता है।
2. श्रीमद्भागवत के बारे में भ्रांतियों का खंडन किया जाता है, शंकाओं का समाधान होता है।