Course Duration
80 घंटे
80 घंटे
Videos
2 घंटे/ सत्र
2 घंटे/ सत्र
No. Of Sessions
40
40
Sessions per week
1
1
Language
Hindi
Eligibility
कोई भी इच्छुक भक्त
कोई भी इच्छुक भक्त
Schedule of Classes
Starts on
-
सायं 7 से 9 बजे तक
Regular classes on शनिवारAbout the Teacher
Antaryami Radhapati Das
About the Teacher
अंतर्यामी राधापति प्रभुजी एक प्रतिष्ठित विद्वान हैं, जिनकी शैक्षणिक उपलब्धियाँ और ज्ञान-प्रदर्शन की गहन प्रतिबद्धता उन्हें विशेष बनाती हैं। उन्होंने संस्कृत विषय में अपनी स्नातकोत्तर डिग्री दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से प्राप्त की है। यह उपलब्धि न केवल संस्कृत के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाती है, बल्कि उनके शैक्षणिक उत्कर्ष के प्रति समर्पण को भी प्रमाणित करती है। अंतर्यामी राधापति प्रभुजी निःसंदेह संस्कृत जैसी प्राचीन और दिव्य भाषा के सच्चे आचार्य हैं।
इसके अतिरिक्त, प्रभुजी ने दो वर्षों तक गुरुकुल में अध्यापन सेवा प्रदान की है, जो उनके व्यावहारिक अनुभव को दर्शाता है। यह अनुभव न केवल उन्हें कुशल शिक्षण पद्धतियों से सम्पन्न करता है, बल्कि उन्हें संस्कृत के गूढ़ और सूक्ष्म तत्वों को सरलता से विद्यार्थियों तक पहुँचाने में भी सक्षम बनाता है। उनकी यह शिक्षण-यात्रा और शैक्षणिक योगदान हमारे सांस्कृतिक एवं भाषिक विरासत के संरक्षण तथा प्रसार की दिशा में एक अनुकरणीय प्रयास है।
Course Overview
भगवद्गीता अध्याय 13–18
- अध्याय 13: प्रकृति, पुरुष तथा चेतना
- अध्याय 14: प्रकृति के तीन गुण
- अध्याय 15: पुरुषोत्तम योग
- अध्याय 16: दैवी और आसुरी स्वभाव
- अध्याय 17: श्रद्धा के विभाग
- अध्याय 18: उपसंहार — संन्यास की सिद्धि
- भगवद्गीता के प्रमुख सिद्धांतों की शास्त्रीय समझ।
- श्रील प्रभुपाद के तात्पर्यों एवं श्रील बलदेव विद्याभूषण की टीका का अध्ययन।
- भक्ति, साधना और शरणागति का व्यावहारिक अनुप्रयोग।
- कृष्णभावनामृत के सिद्धांतों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने का कौशल।
- प्रामाणिक वैष्णव आचार्यों की शिक्षाओं पर आधारित अध्ययन।
- श्लोकों, तात्पर्यों और टीका का व्यवस्थित विश्लेषण।
- आध्यात्मिक साधना एवं शास्त्रीय ज्ञान को सुदृढ़ बनाने पर विशेष ध्यान।