गीता शास्त्री पाठ्यक्रम - भाग 2

By Antaryami Radhapati Das

Certificate Course

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Course Duration

80 Hours

Videos

2 Hours/ Session

No. Of Sessions

40

Sessions per week

3

Language
Hindi

Eligibility

Anyone

Schedule of Classes

calendar

Starts on
-

calendar

7 PM - 9 PM IST

Regular classes on

Monday, Wednesday,  Friday

About the Teacher

teacher

Antaryami Radhapati Das

अंतर्यामी राधापति प्रभुजी  एक प्रतिष्ठित विद्वान हैं, जिनकी शैक्षणिक उपलब्धियाँ और ज्ञान-प्रदर्शन की गहन प्रतिबद्धता उन्हें विशेष बनाती हैं। उन्होंने संस्कृत विषय में अपनी स्नातकोत्तर डिग्री दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से प्राप्त की है। यह उपलब्धि केवल संस्कृत के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाती है, बल्कि उनके शैक्षणिक उत्कर्ष के प्रति समर्पण को भी प्रमाणित करती है। अंतर्यामी राधापति प्रभुजी निःसंदेह संस्कृत जैसी प्राचीन और दिव्य भाषा के सच्चे आचार्य हैं।

इसके अतिरिक्त, प्रभुजी ने दो वर्षों तक गुरुकुल में अध्यापन सेवा प्रदान की है, जो उनके व्यावहारिक अनुभव को दर्शाता है। यह अनुभव केवल उन्हें कुशल शिक्षण पद्धतियों से सम्पन्न करता है, बल्कि उन्हें संस्कृत के गूढ़ और सूक्ष्म तत्वों को सरलता से विद्यार्थियों तक पहुँचाने में भी सक्षम बनाता है। उनकी यह शिक्षण-यात्रा और शैक्षणिक योगदान हमारे सांस्कृतिक एवं भाषिक विरासत के संरक्षण तथा प्रसार की दिशा में एक अनुकरणीय प्रयास है।


Course Overview

पाठ्यक्रम विवरण:

भगवद्गीता के अध्याय 7 से 12 तक का अध्ययन भक्तियोग के हृदय को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस भाग में भगवान श्रीकृष्ण अपनी दिव्य शक्तियों, भक्ति के महत्व, अपने विराट एवं दिव्य स्वरूप तथा शुद्ध भक्त के गुणों का विस्तार से वर्णन करते हैं। यह अध्ययन साधक को भगवान के साथ अपने संबंध को गहराई से समझने तथा जीवन में भक्ति को व्यावहारिक रूप से अपनाने में सहायता करता है।

अध्याय 7 – ज्ञान-विज्ञान योग

इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अपनी भौतिक एवं आध्यात्मिक शक्तियों का वर्णन करते हैं तथा बताते हैं कि वे समस्त कारणों के परम कारण हैं। जीव, प्रकृति और भगवान के संबंध को समझाया गया है।

अध्याय 8 – अक्षर ब्रह्म योग

इस अध्याय में मृत्यु के समय भगवान का स्मरण, आत्मा की यात्रा तथा परम धाम की प्राप्ति का वर्णन है। साधक को निरंतर कृष्णभावनामृत में स्थित रहने की प्रेरणा दी जाती है।

अध्याय 9 – राजविद्या राजगुह्य योग

इसे गीता का अत्यंत गोपनीय एवं श्रेष्ठ ज्ञान कहा गया है। भगवान बताते हैं कि शुद्ध भक्ति सबसे सरल और सर्वोच्च मार्ग है तथा भक्त सदैव भगवान की विशेष कृपा प्राप्त करता है।

अध्याय 10 – विभूति योग

भगवान श्रीकृष्ण अपनी दिव्य विभूतियों का वर्णन करते हैं और बताते हैं कि संसार की सभी अद्भुत एवं महान वस्तुएँ उनकी शक्ति का अंश मात्र हैं।

अध्याय 11 – विश्वरूप दर्शन योग

इस अध्याय में अर्जुन भगवान के विराट विश्वरूप का दर्शन करते हैं। इससे भगवान की असीम शक्ति, ऐश्वर्य और सर्वव्यापकता प्रकट होती है।

अध्याय 12 – भक्ति योग

यह अध्याय शुद्ध भक्त के गुणों तथा भक्ति के महत्व को स्पष्ट करता है। भगवान बताते हैं कि प्रेममयी भक्ति ही उन्हें प्राप्त करने का सर्वोत्तम साधन है।

यह कोर्स विद्यार्थियों को भगवद्गीता के इन महत्वपूर्ण अध्यायों का गहन अध्ययन कराकर उनके आध्यात्मिक जीवन, साधना एवं प्रचार कौशल को सुदृढ़ बनाने में सहायता करता है।

आप क्या सीखेंगे:

  • गीता का गहन ज्ञान और भक्तिमय जीवन में उसका व्यावहारिक अनुप्रयोग
  • मूलभूत सिद्धांत और उनका व्यावहारिक अनुप्रयोग

इस कोर्स की विशेषताएँ:

एक प्रभावशाली प्रचारक और शिक्षक बनने के लिए

इस पाठ्यक्रम में क्यों भाग लेना चाहिए?

एक प्रभावशाली प्रचारक और शिक्षक बनने के लिए

Frequently Asked Questions